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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड छंद 321

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

पहिचान को केहि जान सबहि अपान सुधि भोरी भई । आनंद कंदु बिलोकि दूलहु उभय दिसि आनँदमई ॥ सुर लखे राम सुजान पूजे मानसिक आसन दए । अवलोकि सीलु सुभाउ प्रभु को बिबुध मन प्रमुदित भए ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कौन किसको जाने-पहिचाने! सबको अपनी ही सुध भूली हुई है। आनंदकन्द दूलहको देखकर दोनों ओर आनंदमयी स्थिति हो रही है। सुजान श्रीरामचन्द्रजीने देवताओंको पहिचान लिया और उनकी मानसिक पूजा करके उन्हें मानसिक आसन दिये। प्रभुका शील-स्वभाव देखकर देवगण मनमें बहुत आनंदित हुए।

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श्रीरामचरितमानस छंद 321 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik