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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 105

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

सिद्ध तपोधन जोगिजन सुर किंनर मुनिबृंद । बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिव सुखकंद ॥ १०५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सिद्ध, तपस्वी, योगीगण, देवता, किन्नर और मुनियोंके समूह उस पर्वतपर रहते हैं। वे सब बड़े पुण्यात्मा हैं और आनन्दकन्द श्रीमहादेवजीकी सेवा करते हैं ॥ १०५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 105 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik