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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 106

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल । नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल ॥ १०६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उनके सिरपर जटाओंका मुकुट और गंगाजी [शोभायमान] थीं। कमलके समान बड़े-बड़े नेत्र थे। उनका नील कंठ था और वे सुन्दरताके भण्डार थे। उनके मस्तकपर द्वितीयाका चन्द्रमा शोभित था ॥ १०६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 106 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik