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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 107

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रभु समरथ सर्वज्ञ सिव सकल कला गुन धाम । जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कल्पतरु नाम ॥ १०७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे प्रभो! आप समर्थ, सर्वज्ञ और कल्याणस्वरूप हैं। सब कलाओं और गुणोंके निधान हैं और योग, ज्ञान तथा वैराग्यके भण्डार हैं। आपका नाम शरणागतोंके लिये कल्पवृक्ष है ॥ १०७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 107 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik