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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 108

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि । देखि चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि ॥ १०८ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यदि वे राजपुत्र हैं तो ब्रह्म कैसे? [और यदि ब्रह्म हैं तो] स्त्रीके विरहमें उनकी मति बावली कैसे हो गयी? इधर उनके ऐसे चरित्र देखकर और उधर उनकी महिमा सुनकर मेरी बुद्धि अत्यन्त चकरा रही है ॥ १०८ ॥

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