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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 116

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ । रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ ॥ ११६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो पुरुष प्रसिद्ध हैं, प्रकाशके भण्डार हैं, सब रूपोंमें प्रकट हैं, जीव, माया और जगत् सबके स्वामी हैं, वे ही रघुकुलमणि श्रीरामचन्द्रजी मेरे स्वामी हैं- ऐसा कहकर शिवजीने उनको मस्तक नवाया ॥ ११६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 116 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik