वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह । जब तेहिं जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह ॥ १२३ ॥
प्रभुने छलसे उस स्त्रीका व्रत भंग कर देवताओंका काम किया। जब उस स्त्रीने यह भेद जाना, तब उसने क्रोध करके भगवानको शाप दिया ॥ १२३ ॥
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