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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 127

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहाना । भरद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवाना ॥ १२७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यद्यपि शिवजीने यह हितकी शिक्षा दी, पर नारदजीको वह अच्छी न लगी। हे भरद्वाज! अब कौतुक (तमाशा) सुनो। हरिकी इच्छा बड़ी बलवान है ॥ १२७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 127 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik