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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 129

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार । श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार ॥ १२९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस (हरिमाया) ने रास्तेमें सौ योजन (चार सौ कोस) का एक नगर रचा। उस नगरीकी भाँति-भाँतिकी रचनाएँ लक्ष्मीनिवास भगवान विष्णुके नगर (वैकुंठ) से भी अधिक सुन्दर थीं ॥ १२९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 129 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik