वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि । कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि ॥ १३० ॥
[फिर] राजाने राजकुमारीको लाकर नारदजीको दिखलाया [और पूछा कि—] हे नाथ! आप अपने हृदयमें विचारकर इसके सब गुण-दोष कहिये ॥ १३० ॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस