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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 133

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ । बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ ॥ १३३ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वहाँ दो शिवजीके गण भी थे। वे सब भेद जानते थे और ब्राह्मणका वेष बनाकर सारी लीला देखते-फिरते थे। वे भी बड़े मौजी थे ॥ १३३ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 133 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik