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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 135

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

होउ निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ । हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ ॥ १३५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तुम दोनों कपटी और पापी जाकर राक्षस हो जाओ। तुमने हमारी हँसी की, उसका फल चखो। अब फिर किसी मुनिकी हँसी करना ॥ १३५ ॥

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