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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 136

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु । स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु ॥ १३६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

असुरोंको मदिरा और शिवजीको विष देकर तुमने स्वयं लक्ष्मी और सुन्दर [कौस्तुभ] मणि ले ली। तुम बड़े धोखेबाज और मतलबी हो। सदा कपटका व्यवहार करते हो ॥ १३६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 136 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik