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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 137

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

श्राप सीस धरि हरषि हियँ प्रभु बहु बिनती कीन्हि । निज माया कै प्रबलता करि कृपानिधि लीन्हि ॥ १३७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

शापको सिरपर चढ़ाकर, हृदयमें हर्षित होते हुए प्रभुने नारदजीसे बहुत विनती की और कृपानिधान भगवानने अपनी मायाकी प्रबलता खींच ली ॥ १३७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 137 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik