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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 145

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात । बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात ॥ १४५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कानोंमें अमृतके समान लगनेवाले वचन सुनते ही उनका शरीर पुलकित और प्रफुल्लित हो गया। तब मनुजी दण्डवत करके बोले, प्रेम हृदयमें समाता न था— ॥ १४५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 145 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik