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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

दो०— बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि । होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि ॥ १४ ( छ ) ॥

Do. - Bibudha bipra budha graha charana bandi kahaun kara jori. Hoi prasanna puravahu sakala manju manoratha mori. 14 (chha)

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

देवता, ब्राह्मण, पण्डित, ग्रह—इन सबके चरणोंकी वन्दना करके हाथ जोड़कर कहता हूँ कि आप प्रसन्न होकर मेरे सारे सुन्दर मनोरथोंको पूरा करें॥ १४ (छ) ॥

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