वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु । भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु ॥ १५२ ॥
[याज्ञवल्क्यजी कहते हैं-] हे भरद्वाज! इस अत्यन्त पवित्र इतिहासको शिवजीने पार्वतीसे कहा था। अब श्रीरामके अवतार लेनेका दूसरा कारण सुनो ॥ १५२ ॥
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