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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 154

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रवेशु । अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु ॥ १५४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

संसारभरको अपनी भुजाओंके बलसे वशमें करके राजाने अपने नगरमें प्रवेश किया। राजा अर्थ, धर्म और काम आदिके सुखोंका समयानुसार सेवन करता था ॥ १५४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 154 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik