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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 156

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहू । चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहू ॥ १५६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नील पर्वतके शिखरके समान विशाल [शरीरवाले] उस सूअरको देखकर राजा घोड़ेको चाबुक लगाकर तेजीसे चला और उसने सूअरको ललकारा कि अब तेरा बचाव नहीं हो सकता ॥ १५६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 156 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik