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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 164

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ । एकछत्र रिपुहीन महि राज कल्प सत होउ ॥ १६४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरा शरीर वृद्धावस्था, मृत्यु और दुःखसे रहित हो जाय; मुझे युद्धोंमें कोई जीत न सके और पृथ्वीपर मेरा सौ कल्पतक एकछत्र अकंटक राज्य हो ॥ १६४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 164 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik