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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 166

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

होइ बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ । तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउ ॥ १६६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वे ब्राह्मण किस प्रकारसे वशमें हो सकते हैं, कृपा करके वह भी बताइये। हे दीनदयालु! आपको छोड़कर और किसीको मैं अपना हितैषी नहीं देखता ॥ १६६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 166 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik