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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 172

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

नृप हरषे पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत । बरे तुरत सत सहस्र बर बिप्र कुटुंब समेत ॥ १७२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

[संकेतके अनुसार] गुरुकी [उस रूपमें] पहचानकर राजा प्रसन्न हुआ। भ्रमवश उसे चेत न रहा [कि यह तापस मुनि है या कालकेतु राक्षस]। उसने तुरंत एक लाख उत्तम ब्राह्मणोंको कुटुम्बसहित निमन्त्रण दे दिया ॥ १७२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 172 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik