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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 174

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर । किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर ॥ १७४ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन्! यद्यपि तुम्हारा दोष नहीं है, तो भी होनहार नहीं मिटता। ब्राह्मणोंका शाप बहुत ही भयानक होता है, यह किसी तरह भी टाले टल नहीं सकता ॥ १७४ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 174 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik