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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 175

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

भरदाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम । धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम ॥ १७५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

[याज्ञवल्क्यजी कहते हैं—] हे भरदाज! सुनो, विधाता जब जिसके विपरीत होते हैं, तब उसके लिये धूलि सुमेरुपर्वतके समान (भारी और कुचल डालनेवाली), पिता यमके समान (कालरूप) और रस्सी साँपके समान (काट खानेवाली) हो जाती है ॥ १७५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 175 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik