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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 176

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप । तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अधरूप ॥ १७६ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यद्यपि वे पुलस्त्य ऋषिके पवित्र, निर्मल और अनुपम कुलमें उत्पन्न हुए, तथापि ब्राह्मणोंके शापके कारण वे सब पापरूप हुए ॥ १७६ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 176 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik