वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु । तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु ॥ १७७ ॥
फिर ब्रह्माजी विभीषणके पास गये और बोले- हे पुत्र! वर माँगो। उसने भगवानके चरणकमलोंमें निर्मल (निष्काम और अनन्य) प्रेम माँगा ॥ १७७ ॥
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