वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ । मनहुँ तोलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ ॥ १७९ ॥
फिर उसने जाकर [एक बार] खिलवाड़में कैलास पर्वतको उठा लिया और मानो अपनी भुजाओंका बल तोलकर, बहुत सुख पाकर वह वहाँसे चला आया ॥ १७९ ॥
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