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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 180

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय । एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय ॥ १८० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

[इनके अतिरिक्त] दुर्मुख, अकम्पन, वज्रदन्त, धूमकेतु और अतिकाय आदि ऐसे अनेक योद्धा थे, जो अकेले ही सारे जगतको जीत सकते थे ॥ १८० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 180 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik