वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
जानि सभय सुर भूमि सुनि बचन समेत सनेह । गगनगिरा गंभीर भई हरनि सोक संदेह ॥ १८६ ॥
देवता और पृथ्वीको भयभीत जानकर और उनके स्नेहयुक्त वचन सुनकर शोक और सन्देहको हरनेवाली गम्भीर आकाशवाणी हुई- ॥ १८६ ॥
आगे पढ़ें — बाल काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस