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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 189

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तब अदृश्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ । परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ ॥ १८९ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तदनन्तर अग्निदेव सारी सभाको समझाकर अन्तर्धान हो गये। राजा परमानन्दमें मग्न हो गये, उनके हृदयमें हर्ष समाता न था ॥ १८९ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 189 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik