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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 192

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार । निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार ॥ १९२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

ब्राह्मण, गौ, देवता और संतोंके लिये भगवानने मनुष्यका अवतार लिया। वे [अज्ञानमयी, मलिना] माया और उसके गुण (सत्, रज, तम) और [बाहरी तथा भीतरी] इन्द्रियोंसे परे हैं। उनका [दिव्य] शरीर अपनी इच्छासे ही बना है [किसी कर्मबन्धनसे परवश होकर त्रिगुणात्मक भौतिक पदार्थोंके द्वारा नहीं] ॥ १९२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 192 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik