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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 200

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान । सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान ॥ २०० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रेममें मग्न कौसल्याजी रात और दिनका बीतना नहीं जानती थीं। पुत्रके स्नेहवश माता उनके बालचरित्रोंका गान किया करती थीं ॥ २०० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 200 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik