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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 201

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

देखरावा मातहि निज अद्भुत रूप अखंड । रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड ॥ २०१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

फिर उन्होंने माताको अपना अखंड अद्भुत रूप दिखलाया, जिसके एक-एक रोममें करोड़ों ब्रह्मांड लगे हुए हैं ॥ २०१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 201 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik