वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
भोजन करत चपल चित इत उत अवसर पाइ । भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ ॥ २०३ ॥
भोजन करते हैं पर चित्त चंचल है। अवसर पाकर मुँहमें दही-भात लपेटाये किलकारी मारते हुए इधर-उधर भाग चले ॥ २०३ ॥
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