वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप । भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप ॥ २०५ ॥
जो व्यापक, अकल (निर्वयव), इच्छारहित, अजनमा और निर्गुण हैं, तथा जिनका न नाम है न रूप, वही भगवान भक्तोंके लिये नाना प्रकारके अनुपम (अलौकिक) चरित्र करते हैं ॥ २०५ ॥
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