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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 205

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप । भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप ॥ २०५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो व्यापक, अकल (निर्वयव), इच्छारहित, अजनमा और निर्गुण हैं, तथा जिनका न नाम है न रूप, वही भगवान भक्तोंके लिये नाना प्रकारके अनुपम (अलौकिक) चरित्र करते हैं ॥ २०५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 205 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik