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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 215

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर । बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर ॥ २१५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मनको प्रेममें मग्न जान राजा जनकने विवेकका आश्रय लेकर धीरज धारण किया और मुनिके चरणोंमें सिर नवाकर गद्गद (प्रेमभरी) गंभीर वाणीसे कहा ॥ २१५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 215 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik