वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
बिप्रकाजु करि बंधु दोउ मग मुनिबधू उधारि । आए देखन चापमख सुनि हरषीं सब नारि ॥ २२१ ॥
दोनों भाई ब्राह्मणका काम करके [और] मार्गमें मुनिके स्त्री (अहल्या) का उद्धार करके धनुषयज्ञ देखने आये हैं, यह सुनकर सब स्त्रियाँ हर्षित हुईं ॥ २२१ ॥
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