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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 222

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि । यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि ॥ २२२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

नहीं तो [विवाह न हुआ तो] हे सखी! सुनो, हमको इनके दर्शन दुर्लभ हैं। यह संयोग तभी होता है जब हमारे पहले किये हुए पुण्य बहुत हों ॥ २२२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 222 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik