वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान । गुर ते पहिलेहिं जगतपति जागे राम सुजान ॥ २२६ ॥
भी रात बीत गयी, मुर्गेके बोलनेकी ध्वनि सुनकर लक्ष्मणजी उठे। जबकि स्वामी सुजान श्रीरामचन्द्रजी गुरुससे पहले ही जाग गये थे ॥ २२६ ॥
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