वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन । कहहु कारनु निज हरष कर पूँछहिं सब मृदु बैन ॥ २२८ ॥
सखियोंने उसकी दशा देखी- उसका शरीर पुलकित है और नेत्रोंमें जल भरा है। [तब] सब कोमल वाणीसे पूछने लगीं- अपने हर्षका कारण कहो ॥ २२८ ॥
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