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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 228

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन । कहहु कारनु निज हरष कर पूँछहिं सब मृदु बैन ॥ २२८ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सखियोंने उसकी दशा देखी- उसका शरीर पुलकित है और नेत्रोंमें जल भरा है। [तब] सब कोमल वाणीसे पूछने लगीं- अपने हर्षका कारण कहो ॥ २२८ ॥

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