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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 231

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

करत बतकही अनुज सन मन सिय रूप लोभान । मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान ॥ २३१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यों श्रीरामजी छोटे भाईसे बातें कर रहे हैं, पर मन सीताजीके रूपमें लुभाया हुआ उनके मुखरूपी कमलके छबिरूपी मकरन्दरूप रसको भौंरेकी तरह पी रहा है ॥ २३१ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 231 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik