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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 235

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख । महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष ॥ २३५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे मातु! पतिव्रता स्त्रियोंमें आपकी रेखा सबसे पहली है। आपकी महिमा अमित है। हजारों सरस्वती और शेषजी भी उसका वर्णन नहीं कर सकते ॥ २३५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 235 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik