वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
सतानंद पद बंदि प्रभु बैठे गुरु पहिं जाइ । चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ ॥ २३९ ॥
शतानन्दजीके चरणोंकी वन्दना करके प्रभु श्रीरामचन्द्रजी गुरुजीके पास जा बैठे। तब मुनिने कहा- हे तात! चलो, जनकजीने बुला भेजा है ॥ २३९ ॥
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