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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 240

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि । उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि ॥ २४० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उन सेवकोंने कोमल और नम्र वचन कहकर उत्तम, मध्यम, नीच और लघु (सभी श्रेणीके) स्त्री-पुरुषोंको अपने-अपने योग्य स्थानपर बैठाया ॥ २४० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 240 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik