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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 247

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल । तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल ॥ २४७ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस प्रकार जब सुंदरता और सुखकी मूल लक्ष्मी उत्पन्न हो, तो भी कवि लोग उसे बहुत संकोचके साथ सीताजीके समान कहेंगे ॥ २४७ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 247 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik