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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 250

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ । मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ ॥ २५० ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

वे मूर्ख राजा तमककर (किटकिटाकर) धनुष को पकड़ते हैं, परन्तु जब नहीं उठता तो लजाकर चले जाते हैं, मानो वीरों की भुजाओं का बल पाकर वह धनुष अधिक-अधिक भारी होता जाता है ॥ २५० ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 250 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik