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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 251

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरतिअति कमनीय । पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय ॥ २५१ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परन्तु धनुष को तोड़कर मनोहर कन्या, बड़ी विजय और अत्यन्त सुंदर कीर्ति को पाने वाला मानो ब्रह्मा ने किसी को रचा ही नहीं ॥ २५१ ॥

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