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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 252

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

कहि न सकत रघुबीर डर लगे बचन जनु बान । नाइ राम पद कमल सिरु बोले गिरा प्रमान ॥ २५२ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रघुवीरजी के डर से कुछ कह तो सकते नहीं, पर जनक के वचन उन्हें बाण से लगे। (जब न रह सके तब) श्री रामचन्द्रजी के चरण कमलों में सिर नवाकर वे यथार्थ वचन बोले- ॥ २५२ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 252 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik