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श्रीरामचरितमानस · बाल काण्ड

बाल काण्ड दोहा 255

बाल काण्ड · Baal Kaand

मूल पाठ

रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ । सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ ॥ २५५ ॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्री रामचन्द्रजी को (वात्सल्य) प्रेम के साथ देखकर और सखियों को समीप बुलाकर सीताजी की माता स्नेहवश बिलखकर (विलाप करती हुई सी) ये वचन बोलीं- ॥ २५५ ॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 255 बाल काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik