वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥ १ ॥
अर्थ: अक्षरों, अर्थसमूहों, रसों, छन्दों और मंगलोंकी करनेवाली सरस्वतीजी और गणेशजीकी मैं वन्दना करता हूँ॥ १ ॥
बाल काण्ड · Baal Kaand
राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि । चितई सिय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि ॥ २६० ॥
श्रीरामजीने सब लोगोंकी ओर देखा और उन्हें चित्रमें लिखे हुएसे देखकर फिर कृपाधाम श्रीरामजीने सीताजीकी ओर देखा और उन्हें विशेष व्याकुल जाना ॥ २६० ॥
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